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अमेठी।
ईश्वर प्राप्ति अत्यंत सरल है, क्योंकि वह जीवन की महती आवश्यकता है। उसकी साधना भी सहज है। इसके लिए किसी कठिन दौड़-धूप अथवा विशेष साधन-सामग्री जुटाने की आवश्यकता नहीं है। तपश्चर्या, योग साधना और विभिन्न योग प्रक्रियाओं का उद्देश्य केवल इतना है कि मनुष्य के भीतर छाई निद्रा और मूर्च्छा दूर हो सके। जो साधना इस उद्देश्य को पूरा कर सके, उसी के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सहज बन सकता है।
यह विचार चालीस दिवसीय गायत्री महापुरुश्चरण साधना के पंद्रहवें दिन सुबह पूजन-अर्चन के दौरान पंडित सुभाष चंद्र द्विवेदी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि साधक को अपने चिंतन को इसी लक्ष्य पर केंद्रित करना चाहिए कि “यह जीवन परमेश्वर का है, परमेश्वर के लिए है और वही कार्य किया जाए, जो परमेश्वर ने हमारे लिए निर्धारित किया है।”
उन्होंने कहा कि मनुष्य को पदार्थोमें सुख तलाशने के बजाय अपनी प्रवृत्तियों में उत्कृष्टता और जीवन में वास्तविक आनंद की खोज करनी चाहिए। जब चिंतन और आचरण श्रेष्ठ दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी साधना सार्थक होती है और जीवन में आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।
इस अवसर पर इंद्रदेव शर्मा, माता फेर श्रीवास्तव, सुनील कुमार श्रीवास्तव, चिरौजीलाल, जितेंद्र कुमार सिंह, शकुंतला पांडे, कुसुम शर्मा सहित अन्य साधक उपस्थित रहे।

