Uptoday न्यूज।
अमेठी। कहते हैं यथा राजा तथा कर्मी वर्तमान समय में तहसील अमेठी घूसखोरी का अड्डा बना हुआ है। उपजिलाधिकारी महोदय संविधान से हटकर अपने अनुसार नियम कानून बनाकर मनमानी पर उतारू हैं और इनकी सरपरस्ती में राजस्व कर्मी दबाकर घूस ले रहे हैं। मनमानी की पराकाष्ठा यह है कि जिस फाइल में चढ़ावा मिल जाए उसमें त्वरित आदेश हो जाता है नहीं तो संविधान में दिए नियम कानून को भी ताक पर रख देते हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं उपजिलाधिकारी अमेठी की जिनका रुतबा इस कदर हाई लेवल पर है कि कमरा बंद कर केवल बीबीआईपी को अंदर आने की तरजीह देते है बाकी आम आदमी वा अधिवक्ता इनके द्वारा बदतमीज़ी कर भगा दिया जाता है। इनके मनमाने रवैये का आलम यह है कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 32/38 के अंतर्गत आने वाले त्रुटि पूर्ण संशोधन को नियमानुसार दुरुस्तीकरण का प्रावधान होने के बावजूद यह कहते हुए खारिज कर देते हैं कि मेरी मर्जी मै आदेश नहीं करूंगा । वहीं धारा 144 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में मोटा माल राजस्व कर्मियों के लिये बन जाता है अतः इनके द्वारा सारी फाइलें उस धारा में लाने के लिये दबाव बनाया जाता है। इनकी हालत यह है कि इनके आने के पश्चात ज्यादातर लेखपाल अपने मुंशी पर निर्भर हो गये हैं और मुंशी बिना मोटा माल लिए कोई कार्य नहीं करते। उपजिलाधिकारी अपने ओहदे की हनक इस प्रकार दिखाते हैं कि इनका अर्दली अधिवक्ताओं से बदतमीज़ी करता नजर आता है। इसके साथ ही इनके द्वारा लंबे समय से cop धारक कार्यकर्ताओं की प्रमाणिकता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाया जा रहा है। इनकी बदतमीज़ी का आलम यह है कि अमेठी तहसील पीड़ितों से महरूम होती जा रही है।

